LPG cylinder price: प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के 10.58 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए एक बड़ा बदलाव किया गया है. सरकार ने सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या में कटौती कर दी है. अब उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को साल में 9 की जगह सिर्फ 4 सिलेंडर पर ही सब्सिडी मिलेगी. इस फैसले के बाद करोड़ों परिवारों को मिलने वाली सालाना राहत में करीब 1500 रुपये तक की कमी आ सकती है.
अब तक उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती थी. इस हिसाब से उन्हें पूरे वर्ष में 2700 रुपये तक का लाभ मिलता था. लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब केवल 4 रिफिल पर ही 300 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी. यानी कुल वार्षिक लाभ घटकर 1200 रुपये रह जाएगा.
हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पहुंच गई है. ऐसे में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को पहले चार सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी के बाद प्रभावी रूप से 642 रुपये में मिलेंगे. हालांकि चार रिफिल की सीमा पूरी होने के बाद बाकी सिलेंडर बाजार मूल्य पर ही खरीदने होंगे.
गौरतलब है कि जब वर्ष 2016 में उज्ज्वला योजना शुरू की गई थी, तब लाभार्थियों को साल में 12 सिलेंडर तक सब्सिडी का लाभ मिलता था. बाद में यह संख्या घटाकर 9 कर दी गई और अब इसे और कम करते हुए 4 कर दिया गया है.
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा उज्ज्वला लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती रहेगी. यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी.
योजना का लाभ लेने के लिए महिला की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए. साथ ही वह गरीब या सरकार द्वारा चिन्हित पात्र परिवार से संबंधित हो. परिवार में पहले से एलपीजी कनेक्शन नहीं होना चाहिए और आधार कार्ड, बैंक खाता तथा अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध होने चाहिए.
सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है. हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि सब्सिडी पूरी तरह समाप्त नहीं की गई है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को राहत जारी रखने के लिए सीमित कर दी गई है.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार उज्ज्वला लाभार्थियों की औसत वार्षिक खपत को ध्यान में रखते हुए यह नई सीमा तय की गई है. साथ ही तेल विपणन कंपनियों को एलपीजी की बिक्री पर अभी भी भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है.
इस बदलाव के बाद अब करोड़ों उज्ज्वला परिवारों को अपने घरेलू बजट में अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ सकता है. खासकर ग्रामीण और गरीब परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.