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खाते में 0 बैलेंस, फिर भी होगा UPI पेमेंट! बिना क्रेडिट कार्ड खर्च कर सकेंगे 50,000 तक, जानिए CLOU का पूरा खेल

खाते में 0 बैलेंस, फिर भी होगा UPI पेमेंट! बिना क्रेडिट कार्ड खर्च कर सकेंगे 50,000 तक, जानिए CLOU का पूरा खेल

UPI Payments:: भारत में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसी तेजी से नई-नई सुविधाएं भी लोगों तक पहुंच रही हैं. अब UPI सिर्फ पैसे ट्रांसफर करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह धीरे-धीरे डिजिटल क्रेडिट का भी बड़ा प्लेटफॉर्म बनता जा रहा है. इसी कड़ी में एक नई सुविधा CLOU (Credit Line on UPI) इन दिनों चर्चा में है. इस सुविधा के जरिए बैंक खाते में एक भी रुपया नहीं होने पर भी UPI से पेमेंट किया जा सकेगा.

यानी अगर आप किसी दुकान पर खरीदारी करने पहुंचे हैं और आपके खाते में बैलेंस खत्म हो चुका है, तब भी आपका भुगतान रुकेगा नहीं. यदि बैंक ने आपको पहले से क्रेडिट लाइन मंजूर कर रखी है, तो उसी के जरिए आपका पेमेंट पूरा हो जाएगा. यही वजह है कि इस सुविधा को UPI सिस्टम का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है.

क्या है CLOU और कैसे करता है काम?

CLOU यानी Credit Line on UPI एक तरह की प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट सुविधा है. इसमें बैंक या वित्तीय संस्था ग्राहक को पहले से एक निश्चित लोन लिमिट उपलब्ध कराती है. जरूरत पड़ने पर ग्राहक उसी राशि का इस्तेमाल UPI पेमेंट के लिए कर सकता है.

मान लीजिए आपके खाते में 0 बैलेंस है, लेकिन बैंक ने आपको 50,000 की क्रेडिट लाइन दी हुई है. ऐसे में यदि आप 5,000 का भुगतान करते हैं, तो पैसा आपके बैंक खाते से नहीं बल्कि उस क्रेडिट लाइन से कटेगा. बाद में आपको यह राशि बैंक द्वारा तय समय सीमा के भीतर चुकानी होगी.

क्रेडिट कार्ड से कितना अलग है यह सिस्टम?

कई लोग CLOU को क्रेडिट कार्ड जैसा समझ रहे हैं, लेकिन दोनों में कई महत्वपूर्ण अंतर हैं. क्रेडिट कार्ड के लिए अलग कार्ड जारी किया जाता है, जिसकी बिलिंग साइकिल, चार्ज और नियम अलग होते हैं. वहीं CLOU पूरी तरह डिजिटल सुविधा है और सीधे आपके बैंक खाते तथा UPI ऐप से जुड़ी रहती है.

इसके लिए किसी फिजिकल कार्ड की जरूरत नहीं होती. ग्राहक अपने मोबाइल से ही भुगतान कर सकता है. यही वजह है कि इसे अधिक आसान और सुविधाजनक विकल्प माना जा रहा है.

छोटे कारोबारियों और गिग वर्कर्स को होगा बड़ा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा का सबसे अधिक फायदा छोटे दुकानदारों, फ्रीलांसरों, डिलीवरी पार्टनर्स, कैब ड्राइवरों और रेहड़ी-पटरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिल सकता है. ऐसे लोगों को अक्सर रोजमर्रा के काम के लिए तत्काल भुगतान करना पड़ता है.

कई बार सप्लायर को पैसे देने, सामान खरीदने या किसी जरूरी खर्च के लिए नकदी की जरूरत पड़ती है. ऐसे में CLOU उनके लिए तत्काल आर्थिक सहारा बन सकता है. उन्हें बार-बार बैंक या किसी व्यक्ति से उधार लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

NBFCs की एंट्री से बढ़ सकता है दायरा

जानकारों का कहना है कि यदि इस सुविधा में NBFCs यानी नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों की भागीदारी बढ़ती है, तो इसका लाभ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक तेजी से पहुंच सकता है.

देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनकी आय नियमित नहीं है. पारंपरिक बैंक अक्सर ऐसे लोगों को आसानी से ऋण नहीं देते, जबकि NBFCs इस वर्ग तक पहुंच बनाने में अधिक सक्षम होती हैं. इसलिए CLOU की सफलता में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है.

हर जगह नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल

हालांकि यह सुविधा पूरी तरह बिना रोक-टोक नहीं होगी. बैंक या लेंडर यह तय कर सकते हैं कि क्रेडिट लाइन का पैसा किन उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.

उदाहरण के लिए यदि किसी विशेष जरूरत या श्रेणी के लिए क्रेडिट सुविधा दी गई है, तो उसका उपयोग दूसरे कामों में सीमित किया जा सकता है. इससे पैसों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने में मदद मिलेगी.

कैसे शुरू करें यह सुविधा?

यदि आपका बैंक यह सुविधा उपलब्ध करा रहा है, तो आप अपने UPI ऐप जैसे Google Pay, PhonePe, BHIM या अन्य समर्थित प्लेटफॉर्म पर जाकर Credit Line विकल्प चुन सकते हैं.

इसके बाद बैंक आपकी पात्रता की जांच करेगा. यदि आप योग्य पाए जाते हैं, तो आपके लिए एक क्रेडिट लिमिट निर्धारित कर दी जाएगी. इसके बाद जरूरत पड़ने पर आप उसी लिमिट का इस्तेमाल UPI भुगतान के लिए कर सकेंगे.

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में CLOU भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है. इससे करोड़ों लोगों को बिना क्रेडिट कार्ड के भी डिजिटल क्रेडिट की सुविधा मिलेगी. साथ ही छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं को तत्काल भुगतान की परेशानी से राहत मिलेगी.

स्रोत: Pehli Nazar News Network