Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों की गहरी झलक देखने को मिली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बने नए मंत्रिमंडल में इस बार हर क्षेत्र को साधने की कोशिश जरूर की गई है, लेकिन प्रतिनिधित्व का संतुलन पूरी तरह बराबर नहीं दिखता। मिथिला और तिरहुत क्षेत्र को ज्यादा तवज्जो मिली है, जबकि चंपारण को सबसे कम हिस्सेदारी मिली है।
मिथिला बना सबसे ताकतवर क्षेत्र, 7 मंत्री शामिल
इस बार मंत्रिमंडल में मिथिला क्षेत्र से सबसे ज्यादा 7 मंत्री बनाए गए हैं। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय से कई बड़े चेहरे शामिल किए गए हैं।
मिथिला से शामिल प्रमुख मंत्री हैं:
- नीतीश मिश्रा (मधुबनी, झंझारपुर)
- शीला कुमारी मंडल (मधुबनी, फुलपरास)
- अरुण शंकर प्रसाद (मधुबनी, खजौली)
- मदन साहनी (दरभंगा)
- रामचंद्र प्रसाद साह (दरभंगा)
- संजय कुमार (बेगूसराय)
- विजय कुमार चौधरी (समस्तीपुर)
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मिथिला को मजबूत प्रतिनिधित्व देकर एनडीए ने उत्तर बिहार में अपनी पकड़ और मजबूत करने की रणनीति अपनाई है।
तिरहुत क्षेत्र में भी मजबूत पकड़, 6 मंत्री शामिल
तिरहुत क्षेत्र से इस बार 6 नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है।
यहां से शामिल प्रमुख नाम हैं:
- दीपक प्रकाश (वैशाली)
- लखेंद्र रौशन (पातेपुर, वैशाली)
- संजय कुमार सिंह (महुआ, वैशाली)
- रमा निषाद (मुजफ्फरपुर)
- केदार गुप्ता (मुजफ्फरपुर)
- श्वेता गुप्ता (शिवहर)
इस क्षेत्र को बढ़ा प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है।
मगध क्षेत्र से 6 मंत्री, कई बड़े चेहरे शामिल
मगध क्षेत्र से भी 6 मंत्री बनाए गए हैं, जहां कई अनुभवी नेताओं को मौका मिला है।
- रामकृपाल यादव (पटना)
- निशांत कुमार (नालंदा)
- श्रवण कुमार (नालंदा)
- अशोक चौधरी (शेखपुरा)
- संतोष सुमन (गया)
- प्रमोद कुमार चंद्रवंशी (जहानाबाद)
हालांकि पटना का प्रतिनिधित्व इस बार सीमित रहा है, लेकिन नालंदा और आसपास के क्षेत्रों को महत्व दिया गया है।
अंग क्षेत्र में मुख्यमंत्री का दबदबा साफ
अंग क्षेत्र से भी 6 नेताओं को मंत्री बनाया गया है, जिसमें मुख्यमंत्री खुद भी शामिल हैं।
- सम्राट चौधरी (मुंगेर – मुख्यमंत्री)
- विजय कुमार सिन्हा (लखीसराय)
- श्रेयसी सिंह (जमुई)
- दामोदर रावत (जमुई)
- कुमार शैलेंद्र (भागलपुर)
- शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल (भागलपुर)
इस क्षेत्र में भाजपा-जेडीयू की मजबूत पकड़ साफ नजर आती है।
शाहाबाद, कोसी और सीमांचल को सीमित प्रतिनिधित्व
- शाहाबाद क्षेत्र (3 मंत्री):
- संजय सिंह टाइगर (भोजपुर)
- भगवान सिंह कुशवाहा (भोजपुर)
- जमा खान (कैमूर)
- कोसी क्षेत्र (2 मंत्री):
- बिजेंद्र यादव (सुपौल)
- रत्नेश सादा (सहरसा)
- सीमांचल क्षेत्र (2 मंत्री):
- लेशी सिंह (पूर्णिया)
- दिलीप जायसवाल (किशनगंज)
चंपारण को सबसे कम हिस्सेदारी
इस बार चंपारण क्षेत्र से सिर्फ एक मंत्री बनाया गया है।
- नंदकिशोर राम (पश्चिम चंपारण)
इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा भी तेज है कि इतने बड़े क्षेत्र को कम प्रतिनिधित्व क्यों मिला।
सारण क्षेत्र से 2 मंत्री
- सुनील कुमार (भोरे, गोपालगंज)
- मिथिलेश तिवारी (बैकुंठपुर, गोपालगंज)
कुल मिलाकर सम्राट चौधरी कैबिनेट का यह गठन साफ संकेत देता है कि सरकार ने क्षेत्रीय संतुलन, जातीय समीकरण और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर मंत्रियों का चयन किया है।
हालांकि मिथिला और तिरहुत को ज्यादा महत्व मिलने से उत्तर बिहार की राजनीतिक दिशा एक बार फिर चर्चा में है, जबकि कुछ क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम प्रतिनिधित्व भविष्य में नए राजनीतिक सवाल खड़े कर सकता है।