राजनीति

अगले चुनाव तक आश्रम में रहेंगे प्रशांत किशोर! फैसले के पीछे की वजह जानकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

अगले चुनाव तक आश्रम में रहेंगे प्रशांत किशोर! फैसले के पीछे की वजह जानकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई बड़ी रैली या राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उनका अचानक पटना के पास एक आश्रम में जाकर रहने का फैसला है। गंगा किनारे बने इस साधारण आश्रम को अब उन्होंने अपना अस्थायी ठिकाना बना लिया है। प्रशांत किशोर ने साफ कहा है कि चुनाव तक वह यहीं रहेंगे और यहीं से बिहार की राजनीति और लोगों की समस्याओं को करीब से समझने की कोशिश करेंगे।

बुधवार सुबह जैसे ही यह खबर सामने आई कि प्रशांत किशोर आश्रम में रहने पहुंचे हैं, राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। बताया जा रहा है कि पटना से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित इस आश्रम में उन्होंने एक छोटा सा कमरा लिया है। कमरे में साधारण चारपाई, कुछ किताबें और दीवार पर बिहार का नक्शा लगा हुआ है। यहां न कोई राजनीतिक मंच दिखाई देता है और न ही नेताओं जैसा भारी सुरक्षा घेरा।

आश्रम के बरामदे में बैठे प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को एयरकंडीशन दफ्तरों में बैठकर नहीं समझा जा सकता। यहां के लोगों की जिंदगी, संघर्ष और उम्मीदों को महसूस करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वह चुनाव तक यहीं रहकर लोगों से सीधे मुलाकात करेंगे और उनकी बातें सुनेंगे।

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आश्रम के लोगों के मुताबिक पीके का दिन सुबह काफी जल्दी शुरू हो जाता है। वह सुबह गंगा किनारे टहलते हैं, फिर लोगों से मुलाकात का सिलसिला शुरू हो जाता है। आश्रम के पुजारी रामबाबू तिवारी ने बताया कि प्रशांत किशोर जमीन पर बैठकर साधारण भोजन करते हैं और लगातार गांवों से आने वाले लोगों से बातचीत करते रहते हैं।

बुधवार शाम का एक दृश्य वहां मौजूद लोगों को काफी भावुक कर गया। बेगूसराय से आई एक बुजुर्ग महिला सुनैना देवी ने प्रशांत किशोर से अपने गांव की परेशानी बताई। उन्होंने कहा कि गांव में अब तक स्कूल नहीं बना है और बच्चों को दूर पढ़ने जाना पड़ता है। पीके ने ध्यान से उनकी बात सुनी और गांव का नाम अपनी डायरी में नोट किया। इस दौरान महिला काफी भावुक हो गईं।

प्रशांत किशोर के इस कदम ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। कुछ लोग इसे जनता से जुड़ने की कोशिश बता रहे हैं, तो कुछ इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आश्रम में रहकर पीके सीधे गांव और आम लोगों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।

जन सुराज से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब रोज अलग-अलग जिलों से लोग आश्रम पहुंचेंगे और अपनी समस्याएं सीधे प्रशांत किशोर के सामने रखेंगे। उनका दावा है कि यहां किसी तरह की रोक-टोक नहीं होगी और आम लोग आसानी से मिल सकेंगे।

प्रशांत किशोर इससे पहले बिहार में लंबी पदयात्रा भी कर चुके हैं। वह लगातार यह कहते रहे हैं कि बिहार को जाति और नारों की राजनीति से बाहर निकालकर शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर बात करने की जरूरत है। अब आश्रम में रहने का उनका फैसला भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि विपक्षी दल इसे सिर्फ राजनीतिक दिखावा बता रहे हैं। कई नेताओं ने कहा कि चुनाव के समय इस तरह के कदम सिर्फ माहौल बनाने के लिए उठाए जाते हैं। लेकिन दूसरी ओर कई लोग इसे अलग तरह की राजनीति की शुरुआत भी मान रहे हैं।

आश्रम के बाहर मौजूद युवाओं और ग्रामीणों में भी इसे लेकर उत्सुकता दिख रही है। कई लोग सिर्फ प्रशांत किशोर को देखने और उनसे मिलने के लिए पहुंच रहे हैं। लोगों का कहना है कि बड़े नेताओं को पहली बार इतने करीब से देखने का मौका मिल रहा है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि चुनाव से पहले शुरू हुआ प्रशांत किशोर का यह ‘आश्रम प्रवास’ बिहार की राजनीति में कितना असर डालता है। लेकिन इतना जरूर है कि गंगा किनारे का यह साधारण आश्रम इन दिनों बिहार की सियासत का नया केंद्र बन गया है।

स्रोत: Pehli Nazar News Network