Samrat Cabinet Expnaion:बिहार की नई राजनीतिक हलचल के बीच रामचंद्र प्रसाद एक बार फिर चर्चा में हैं। दरभंगा जिले के हायाघाट से लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए डॉ. रामचंद्र प्रसाद को अब कैबिनेट में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। यह फैसला नई सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में लिया गया है, जिससे मिथिलांचल की राजनीति में नई ऊर्जा देखने को मिल रही है।
डॉ. रामचंद्र प्रसाद का राजनीतिक सफर किसी बड़े नाम या विरासत से नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी राजनीति से शुरू हुआ है। उन्होंने वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार भोला यादव को करीब 11 हजार वोटों से हराकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया था। इसके बाद लगातार क्षेत्र में उनकी सक्रियता और संगठनात्मक पकड़ मजबूत होती गई।
भाजपा ने इस बार कैबिनेट विस्तार में सामाजिक समीकरणों को साधने पर खास ध्यान दिया है। इसी रणनीति के तहत तेली समाज से आने वाले रामचंद्र प्रसाद को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मिथिलांचल और पिछड़े वर्गों में उनकी मजबूत पकड़ संगठन को और ताकत देगी।
राजनीति में आने से पहले भी रामचंद्र प्रसाद समाजसेवा और स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। वे वर्ष 2011 से 2016 तक जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। इसके अलावा वे भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। बताया जाता है कि उनका जुड़ाव लंबे समय से संगठनात्मक स्तर पर रहा है और वे आरएसएस से भी जुड़े रहे हैं।
उनके परिवार की भूमिका भी राजनीति में कम सक्रिय नहीं है। उनकी पत्नी शीला देवी लगातार वर्ष 2016 से हायाघाट क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य हैं। दोनों पति-पत्नी की जमीनी पकड़ और जनसंपर्क के कारण स्थानीय राजनीति में इनकी मजबूत पहचान बनी हुई है।
कैबिनेट में उनके शामिल होने की खबर के बाद दरभंगा और हायाघाट क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का माहौल है। समर्थकों का कहना है कि यह फैसला मिथिलांचल को प्रतिनिधित्व देने और विकास कार्यों को गति देने की दिशा में अहम कदम है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सम्राट चौधरी की सरकार में रामचंद्र प्रसाद को शामिल करना संगठनात्मक और सामाजिक संतुलन की रणनीति का हिस्सा है। इससे न सिर्फ पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास के मुद्दों को भी सरकार में अधिक प्रभावी तरीके से उठाया जा सकेगा।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि मंत्री बनने के बाद रामचंद्र प्रसाद अपने क्षेत्र और विभाग में किस तरह काम करते हैं और मिथिलांचल की उम्मीदों पर कितना खरा उतरते हैं।