राजनीति

SIR का असर या सियासी खेल? बंगाल चुनाव में वोटर लिस्ट कटौती ने बदल दिया पूरा गणित!

SIR का असर या सियासी खेल? बंगाल चुनाव में वोटर लिस्ट कटौती ने बदल दिया पूरा गणित!

West Bengal Government Formation: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार सिर्फ चुनावी लहर नहीं चली, बल्कि वोटर लिस्ट से नाम कटने का मुद्दा भी सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनकर सामने आया। चुनाव आयोग द्वारा किए गए SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद लाखों वोटरों के नाम सूची से हटाए गए और अब यही आंकड़े चुनाव परिणामों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

एक विश्लेषण के मुताबिक, बीजेपी ने जिन 207 सीटों पर जीत दर्ज की, उनमें से 95 सीटों पर हटाए गए वोटरों की संख्या उम्मीदवार की जीत के अंतर से ज्यादा थी। यानी अगर उन वोटरों के नाम सूची में बने रहते, तो कई सीटों का परिणाम बदल सकता था। यही नहीं, तृणमूल कांग्रेस की 80 सीटों में से 44 सीटों पर भी यही स्थिति देखने को मिली।

सबसे ज्यादा चर्चा मुर्शिदाबाद जिले को लेकर हो रही है, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि वोटर लिस्ट की सफाई के नाम पर चुनिंदा वर्गों और इलाकों को निशाना बनाया गया। वहीं बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग ने सिर्फ फर्जी और डुप्लीकेट वोटरों को हटाने का काम किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में असली लड़ाई सिर्फ बीजेपी और टीएमसी के बीच नहीं थी, बल्कि वोटर लिस्ट के आंकड़ों के बीच भी थी। कई सीटों पर जीत का अंतर कुछ हजार वोटों का रहा, जबकि हटाए गए वोटरों की संख्या उससे कहीं ज्यादा थी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या SIR ने चुनावी नतीजों की दिशा बदल दी?

टीएमसी इस मुद्दे को लोकतंत्र पर हमला बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि गरीब, अल्पसंख्यक और ग्रामीण इलाकों के वोटरों के नाम सबसे ज्यादा हटाए गए। वहीं बीजेपी इसे पारदर्शी प्रक्रिया बताकर विपक्ष पर हार का बहाना खोजने का आरोप लगा रही है।

चुनाव आयोग फिलहाल इस पूरे विवाद पर सफाई दे चुका है कि सभी नाम तय प्रक्रिया और दस्तावेजों की जांच के बाद हटाए गए। आयोग का दावा है कि वोटर लिस्ट को शुद्ध बनाना लोकतंत्र के लिए जरूरी है। लेकिन विपक्ष का सवाल है कि अगर प्रक्रिया निष्पक्ष थी, तो फिर इतनी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम क्यों हटे और इसका असर उन्हीं सीटों पर ज्यादा क्यों दिखा जहां मुकाबला कांटे का था?

बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा हो सकता है। क्योंकि अब सिर्फ सरकार बदलने की चर्चा नहीं हो रही, बल्कि यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या वोटर लिस्ट में बदलाव चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।

राजनीतिक गलियारों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है —

क्या बंगाल में सत्ता परिवर्तन सिर्फ जनता के वोट से हुआ, या वोटर लिस्ट के खेल ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई?

स्रोत: Pehli Nazar News Network