BPSC TRE-4 Protest: पटना में आज एक बार फिर BPSC TRE-4 वैकेंसी को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा सड़कों पर दिखा। हजारों की संख्या में पहुंचे कैंडिडेट्स ने सरकार से जल्द वैकेंसी जारी करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। कई छात्र नेताओं और महिला अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पुलिस ने छात्र नेता रिंकल यादव को हिरासत में ले लिया। इस दौरान उन्हें घसीटते हुए ले जाने का वीडियो भी सामने आया है। रिंकल यादव पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रह चुके हैं और उन्हें तेजप्रताप यादव का समर्थन भी मिला था।
इतना ही नहीं, छात्र नेता खुशबू पाठक को भी प्रदर्शन शुरू होने से पहले हिरासत में लिया गया। पटना कॉलेज इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी। हालात को देखते हुए वाटर कैनन की गाड़ियां भी मौके पर मौजूद रहीं। पुलिस ने पटना कॉलेज का गेट बंद कर दिया और प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन्हें उनका हक नहीं मिल रहा और सरकार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। कई महिला कैंडिडेट्स ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें घसीटते हुए थाने तक पहुंचाया।
इधर, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी आज बिहार बोर्ड कार्यालय पहुंचे थे, जहां उन्होंने पूछताछ-सह-शिकायत निवारण केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या प्रदर्शन करना गुनाह है, तो सवाल सुनते ही शिक्षा मंत्री प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर धन्यवाद कहकर वहां से निकल गए।
हालांकि, इससे पहले एक इंटरव्यू में शिक्षा मंत्री ने कहा कि TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज की जानकारी उन्हें मीडिया से मिली थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इस मामले को लेकर गंभीर हैं और विभाग में बहाली प्रक्रिया को लेकर तेजी से तैयारी चल रही है। मंत्री ने दावा किया कि जल्द ही सुखद परिणाम सामने आएंगे।
वहीं दूसरी ओर, मंगलवार देर शाम प्रशासन ने शिक्षकों के साथ बैठक कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चेतावनी दी। अधिकारियों ने साफ कहा कि अगर आंदोलन में किसी शिक्षक की भूमिका हिंसात्मक गतिविधियों में पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षक गुरु रहमान ने बैठक के बाद कहा कि शिक्षक ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे माहौल खराब हो।
फिलहाल, TRE-4 को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता दिख रहा है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा सवाल बन सकता है।