पटना के प्रतिष्ठित पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में इलाज के दौरान 16 वर्षीय छात्र अमन कुमार गुप्ता की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. सड़क हादसे में घायल हुए अमन की मौत के बाद परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है. मामले की जांच के बाद सात डॉक्टरों और दो स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है.
जानकारी के अनुसार, आनंदपुरी निवासी अमन कुमार गुप्ता पांच जून की सुबह साइकिल से जेपी पथ की तरफ जा रहा था. इसी दौरान एक वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी. हादसे में अमन गंभीर रूप से घायल हो गया था. उसके पैर में कई जगह चोट आई थी, जबकि सिर और नाक पर भी गंभीर चोट लगी थी.
घटना के बाद स्थानीय लोगों की मदद से अमन को इलाज के लिए पीएमसीएच पहुंचाया गया. परिवार वालों को उम्मीद थी कि अस्पताल में समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच जाएगी. लेकिन परिजनों का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी अमन को तुरंत इलाज नहीं मिल सका.
परिवार का कहना है कि घायल अमन काफी देर तक ट्रॉली पर पड़ा रहा. आरोप है कि इलाज शुरू करने में देरी हुई और इसी दौरान उसकी हालत बिगड़ती चली गई. परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाता तो शायद अमन की जान बच सकती थी.
अमन की मौत के बाद परिवार वालों ने अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्यशैली पर सवाल उठाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएमसीएच प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया.
जांच समिति ने पूरे मामले की पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट पीएमसीएच अधीक्षक को सौंप दी है. रिपोर्ट के आधार पर सात डॉक्टरों और दो स्वास्थ्य प्रबंधकों से जवाब मांगा गया है. सभी को नोटिस जारी कर 24 घंटे के अंदर अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है.
जांच के दायरे में सर्जरी विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. पंकज मिश्रा, सीनियर रेजिडेंट डॉ. गौरव झा, न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका शामिल है. इसके अलावा स्वास्थ्य प्रबंधक संजय कुमार मांझी और पुनीता जायसवाल से भी जवाब मांगा गया है.
पीएमसीएच प्रशासन का कहना है कि जांच में अगर किसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल सभी संबंधित लोगों से जवाब मांगा गया है और उसके बाद आगे का फैसला लिया जाएगा.
अमन की मौत ने एक बार फिर बड़े सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी इलाज की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़क हादसे के बाद मरीज को मिलने वाली तुरंत चिकित्सा सुविधा कितनी प्रभावी है, इसको लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.