Education News: देशभर के लाखों छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है. अगर आप नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स (FYUP) में पढ़ाई कर रहे हैं, तो अब पढ़ाई के साथ रिसर्च करने पर 3 लाख तक की आर्थिक सहायता हासिल कर सकते हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली Indian Council of Social Science Research (ICSSR) ने छात्रों के लिए एक नई रिसर्च स्कीम शुरू की है, जिसका नाम ‘युवा शोध प्रतिभा’ रखा गया है.
600 छात्रों को मिलेगा लाभ, 18 करोड़ का बजट
आईसीएसएसआर की ओर से देशभर में कम से कम 600 रिसर्च प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता देने की योजना बनाई गई है. चयनित प्रत्येक प्रोजेक्ट को अधिकतम 3 लाख तक का अनुदान मिलेगा. इस पूरी योजना के लिए करीब 18 करोड़ का फंड निर्धारित किया गया है.
चयनित छात्रों को प्रोजेक्ट स्वीकृत होने की तारीख से आठ महीने के भीतर अपना शोध कार्य पूरा करना होगा. इस पहल का उद्देश्य अंडरग्रेजुएट स्तर पर ही छात्रों को शोध व नवाचार से जोड़ना है, ताकि भविष्य में वे बेहतर शोधकर्ता बन सकें.
आईसीएसएसआर का कहना है कि यह योजना केवल शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा और स्थानीय सामाजिक वास्तविकताओं को समझने का भी अवसर देगी. संस्था चाहती है कि छात्र रिसर्च में भारतीय दृष्टिकोण को प्राथमिकता दें और विभिन्न विषयों में लंबे समय से चले आ रहे यूरोपीय नजरिए को चुनौती दें.
परिषद के अनुसार, छात्रों को ऐसे शोध प्रस्ताव तैयार करने होंगे जो भारतीय समाज, संस्कृति, शिक्षा, इतिहास और ज्ञान परंपराओं को केंद्र में रखकर विकसित किए गए हों.
इन विषयों पर होगा रिसर्च
योजना के तहत आठ प्रमुख विषयों पर रिसर्च प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं...
1. इतिहास, संस्कृति और भाषाओं का भारतीय दृष्टिकोण से अध्ययन
2. इंडो-आर्यन सिद्धांत और ऐतिहासिक कथाओं का पुनर्मूल्यांकन
3. शिक्षा और शोध पद्धतियों को औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त करना
4. स्वास्थ्य, मानसिक सुख-समृद्धि और सामाजिक कल्याण
5. आर्थिक एवं वित्तीय संप्रभुता
6. व्यापार, वित्त और वाणिज्य के भारतीय मॉडल
7. शासन, कानून और राजनीतिक चिंतन
8. ग्रामीण विकास, पर्यावरण और भारतीय ज्ञान प्रणाली
कौन कर सकता है आवेदन?
इस योजना के लिए केवल वही छात्र आवेदन कर सकते हैं जो किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या कॉलेज में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम के तीसरे या चौथे वर्ष में अध्ययन कर रहे हों. विशेष रूप से छठे और सातवें सेमेस्टर के छात्र इसके लिए पात्र माने जाएंगे.
रिसर्च कार्य व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि टीम के रूप में किया जाएगा। प्रत्येक टीम में दो या तीन छात्र शामिल होंगे. इनमें एक छात्र को मुख्य शोधकर्ता (Lead Student Researcher) और बाकी को सह-शोधकर्ता की भूमिका दी जाएगी.
छात्रों के लिए क्यों खास है यह योजना?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना छात्रों को कॉलेज स्तर पर ही रिसर्च का व्यावहारिक अनुभव देगी. साथ ही उन्हें आर्थिक सहायता भी मिलेगी, जिससे वे अपने शोध कार्य को बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे. इससे उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा.
अगर आप 4 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स में पढ़ रहे हैं और रिसर्च में रुचि रखते हैं, तो यह योजना आपके लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है. 3 लाख तक की सहायता के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका भी मिलेगा.