NEET Paper Leak: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। पेपर लीक मामले की जांच और दोबारा परीक्षा की तैयारियों के बीच अब सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की गई है।
इस याचिका में मांग की गई है कि 21 जून को प्रस्तावित दोबारा परीक्षा पारंपरिक पेन-पेपर मोड की जगह कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में कराई जाए। इससे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।
कई हफ्तों से NEET-UG 2026 को लेकर देशभर में बहस चल रही है। लाखों छात्र और उनके माता-पिता परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर नई याचिका ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है।
याचिका में कहा गया है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में पुराने सिस्टम के कारण सुरक्षा संबंधी खामियां सामने आ रही हैं। ऐसे में परीक्षा को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाने के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड अपनाना जरूरी हो गया है।
यह याचिका आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग, डॉक्टर ध्रुव चौहान और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने दाखिल की है। पेपर लीक विवाद के बाद चिंता बढ़ गई है। कई राज्यों से पेपर लीक और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। अब छात्रों और उनके माता-पिता के बीच परीक्षा प्रणाली को लेकर भरोसे का संकट पैदा हो गया है।
क्यों उठ रही है कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड की मांग?
याचिकाकर्ता का मानना है कि अगर कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड में परीक्षा होगी तो पेपर लीक की संभावना काफी कम हो सकती है। डिजिटल सिस्टम में प्रश्नपत्र सीधे सर्वर के जरिए उपलब्ध कराया जाता है, जिससे प्रिंटिंग और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े जोखिम घट जाते हैं। इसके अलावा, परीक्षा केंद्रों पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर तरीके से लागू की जा सकती है।
लाखों छात्रों की नजर अब सुप्रीम कोर्ट पर है। अगर कोर्ट कंप्यूटर आधारित टेस्ट मोड को लेकर कोई बड़ा निर्देश देता है, तो आने वाले समय में देश की बड़ी परीक्षाओं के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।