Bihar News: बिहार के समस्तीपुर जिले के पटोरी प्रखंड में शिक्षा विभाग की जांच के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सभी को हैरान कर दिया है. यहां स्कूलों में हुई जांच के दौरान वित्तीय अनियमितता और लापरवाही के कई मामले सामने आए हैं. सबसे ज्यादा चर्चा उस मामले की हो रही है, जिसमें बच्चों की पढ़ाई और स्कूल व्यवस्था के लिए मिलने वाली राशि से 14 हजार रुपये की जलेबी खरीद दिखाकर पैसे निकालने का आरोप लगा है.
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है.
निलंबित किए गए शिक्षकों में राजकीय प्राथमिक विद्यालय सैदपुर के प्रधान शिक्षक मिलन कुमार, प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक आशीष रंजन, विशिष्ट शिक्षक विमल कुमार बनर्जी और विशिष्ट शिक्षिका स्वीकृति शामिल हैं. सभी के खिलाफ जांच में मिली गड़बड़ियों के आधार पर कार्रवाई की गई है.
जानकारी के अनुसार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मनीष कुमार को कई विद्यालयों में अनियमितताओं की शिकायत मिल रही थी. इसके बाद टीम बनाकर स्कूलों की जांच कराई गई. जांच के दौरान कई गंभीर कमियां सामने आईं.
राजकीय प्राथमिक विद्यालय सैदपुर में जांच टीम को कई खामियां मिलीं. स्कूल का शौचालय और स्टाफ रूम बंद पाया गया. बच्चों को शौचालय के लिए घर जाना पड़ रहा था. वहीं विद्यालय का चापाकल भी खराब मिला. इसके अलावा मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे.
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात समग्र शिक्षा अनुदान कोष से जुड़ी सामने आई. रिकॉर्ड में करीब 14 हजार रुपये की जलेबी खरीद दिखाकर राशि निकासी की गई थी. जांच अधिकारियों ने इसे वित्तीय अनियमितता और सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल का मामला माना.
इसके साथ ही विद्यालय की उपस्थिति पंजी में भी गड़बड़ी पाए जाने की बात सामने आई है. अधिकारियों ने पूरी रिपोर्ट तैयार कर विभाग को भेजी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई.
वहीं प्रोजेक्ट बालिका उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक आशीष रंजन समेत अन्य शिक्षकों पर फर्जी उपस्थिति दर्ज करने, विभागीय आदेशों की अनदेखी करने और गलत जानकारी देने के आरोप लगे हैं. जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की गई.
विभाग की ओर से कहा गया है कि सरकारी योजनाओं के पैसे में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. स्कूलों में बच्चों की सुविधा और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार निगरानी की जाएगी.